टाटा कंज़्यूमर प्रोडक्ट्स और डैनोन इंडिया के बीच होने वाला बड़ा अधिग्रहण फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है.

 


देश में हेल्थ और न्यूट्रिशन से जुड़ा बाज़ार तेज़ी से बदल रहा है. हर बड़ी कंपनी अब चाय-दूध जैसे पारंपरिक कारोबार से आगे निकलकर प्रोटीन, सप्लीमेंट और वेलनेस प्रोडक्ट्स पर दांव लगा रही है. इसी कड़ी में टाटा समूह की एक बड़ी डील चर्चा में थी, लेकिन आख़िरी मोड़ पर आकर यह सौदा अटक गया. वजह सिर्फ़ पैसे नहीं, बल्कि सोच और रणनीति का मेल न होना था.

मुंबई में कॉरपोरेट हलकों में उस वक्त हलचल मच गई, जब यह खबर सामने आई कि टाटा कंज़्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड और डैनोन इंडिया के बीच होने वाला बड़ा अधिग्रहण फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है. यह सौदा 1.2 अरब डॉलर का बताया जा रहा था और उम्मीद थी कि कंपनी इसे 27 जनवरी को होने वाली अर्निंग कॉल में आधिकारिक रूप से घोषित कर देगी. लेकिन बातचीत आख़िरी दौर में पहुंचकर रुक गई.

इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक, मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक डैनोन ने अपने पूरे पोर्टफोलियो के लिए 1.2 अरब डॉलर की कीमत रखी थी. इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई. एक अधिकारी ने कहा, “अगर रणनीतिक फैसलों पर तालमेल नहीं बैठता, तो सौदा रोक देना ही बेहतर होता है. दोनों पक्ष अंतिम समझौते पर एकमत नहीं थे.” यही वजह रही कि लंबे समय से चल रही बातचीत अचानक थम गई.

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