Success Story of SIS Security and His Founder आर.के. सिन्हा
यह कहानी है आर.के. सिन्हा (Ravindra Kishore Sinha) की—एक ऐसे व्यक्ति की, जिन्होंने विचार, अनुशासन और ज़मीन से जुड़े रहने की ताकत से भारत की सबसे बड़ी सुरक्षा कंपनियों में से एक खड़ी कर दी।
आर.के. सिन्हा की पूरी कहानी
साधारण शुरुआत, असाधारण सोच
आर.के. सिन्हा का जन्म बिहार में हुआ। शुरुआती जीवन साधारण था, लेकिन सोच असाधारण। पढ़ाई के बाद उन्होंने पत्रकारिता और सामाजिक गतिविधियों से जुड़कर देश और समाज को बहुत करीब से देखा। इसी दौरान उनका संपर्क लोकनायक जयप्रकाश नारायण (JP) से हुआ, जिन्होंने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी।
जेपी ने सिन्हा से एक बहुत गहरी बात कही—
“देश के लिए जान देने वाले रिटायर्ड फौजियों की ज़िंदगी रिटायरमेंट के बाद भी सम्मानजनक होनी चाहिए।”
यहीं से एक विचार ने जन्म लिया।
विचार से संस्थान तक: SIS की नींव
उस दौर में रिटायर्ड सैनिकों के लिए रोजगार के अवसर बेहद सीमित थे। सिन्हा ने देखा कि
अनुशासन
ईमानदारी
ट्रेनिंग
राष्ट्रभक्ति
ये सभी गुण रिटायर्ड सैनिकों में पहले से मौजूद हैं, बस उन्हें सही प्लेटफॉर्म नहीं मिल रहा।
इसी सोच के साथ उन्होंने Security and Intelligence Services (SIS) की स्थापना की—एक ऐसी कंपनी जो
रिटायर्ड सैनिकों के कौशल को
सुरक्षा सेवाओं जैसे व्यावसायिक क्षेत्र से जोड़ती है।
यह सिर्फ एक बिज़नेस आइडिया नहीं था, बल्कि रोज़गार के ज़रिये राष्ट्र निर्माण की सोच थी।
संघर्ष का दौर
# शुरुआत आसान नहीं थी।
# पूंजी की कमी
# भरोसे की कमी
# बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला
लेकिन सिन्हा के पास था—
धैर्य, अनुशासन और लंबी सोच।
उन्होंने छोटे कॉन्ट्रैक्ट से शुरुआत की, क्वालिटी से समझौता नहीं किया और धीरे-धीरे भरोसा बनाया। एक बार भरोसा बना, तो काम अपने आप बढ़ता चला गया।
आज का SIS: एक वैश्विक पहचान
आज SIS Group:
भारत की सबसे बड़ी सुरक्षा सेवा कंपनी है
टर्नओवर: ₹13,000 करोड़ से अधिक
भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड जैसे देशों में मौजूद
3 लाख से ज्यादा परिवारों की रोज़ी-रोटी का सहारा
यह कंपनी सिर्फ गार्ड्स नहीं देती, बल्कि:
सिक्योरिटी
फैसिलिटी मैनेजमेंट
स्किल डेवलपमेंट
जैसी सेवाओं में भी अग्रणी है।
बिहार से प्यार: मुख्यालय बिहार में ही क्यों?
अरबों का बिज़नेस खड़ा करने के बावजूद आर.के. सिन्हा ने अपनी सभी कंपनियों का मुख्यालय बिहार में ही रखा।
जब उनसे पूछा गया—तो उनका जवाब साफ था:
“अगर मेरे जैसे लोग भी बिहार छोड़ देंगे, तो राज्य का विकास कौन करेगा?”
यह फैसला बताता है कि उनके लिए मुनाफा नहीं, मूल्य (values) ज्यादा अहम हैं।
राजनीति और सामाजिक भूमिका
आर.के. सिन्हा:
# भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे
# पूर्व राज्यसभा सांसद रहे
हमेशा राष्ट्रवाद, रोजगार और युवाओं के मुद्दों पर मुखर रहे
राजनीति उनके लिए सत्ता का साधन नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम रही।
युवाओं के लिए संदेश
आर.के. सिन्हा की कहानी उन युवाओं के लिए है जो:
असफलता से डर जाते हैं
संसाधनों की कमी को बहाना बनाते हैं
अपने राज्य या पहचान को कमजोरी मानते हैं
सिन्हा ने साबित कर दिया कि—
“बिहारीपन कोई कमजोरी नहीं, अगर उसके साथ कड़ी मेहनत और ईमानदारी जुड़ी हो।”
निष्कर्ष
आर.के. सिन्हा की सफलता की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि
विचार की
धैर्य की
और देश के लिए कुछ करने की जिद की कहानी है।
उन्होंने दिखा दिया कि
ज़मीन से जुड़े रहकर भी दुनिया जीती जा सकती है।

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