IPAC क्या है, कैसे पैसा कमाती है, और प्रशांत किशोर की नेटवर्थ क्या है,
🔹 क्या है IPAC?
IPAC का पूरा नाम Indian Political Action Committee है — यह भारत की एक प्रमुख राजनीतिक सलाहकार (Political Consulting) संस्था है।
यह मुख्य रूप से चुनाव रणनीति, प्रचार, डेटा विश्लेषण और राजनीतिक पार्टियों के लिए अभियान योजना जैसी सेवाएं देती है।
2014 में इसे शुरू किया गया था और प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) इसे स्थापित करने वाले प्रमुख चेहरा रहे हैं।
बाद में किशोर ने खुद कंपनी से ऑफिशियल तौर पर अलग होने का दावा किया और अब यह दूसरे डायरेक्टर्स के नेतृत्व में चल रही है (जैसे प्रतीक जैन आदि)।
IPAC कैसे पैसा कमाती है?
IPAC एक प्राइवेट राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म है, और इसके पैसे कमाने के मुख्य स्रोत हैं:
* चुनावी रणनीति और सलाह (Political Campaign Consultancy)
* पार्टियों को चुनाव प्रचार के लिए रणनीति, संदेश, बूथ-स्तर डेटा, वोटर सर्वे, और मीडिया मैनेजमेंट सेवाएं देना।
इसके लिए पार्टियाँ IPAC को बड़े फिस (Fees) देती हैं — यह फीस चुनाव और क्लाइंट के आकार पर निर्भर करती है।
डेटा और एनालिटिक्स सेवाएं
वोटर डेटा, सोशल मीडिया ट्रेंड, और डिजिटल रणनीति के लिए विश्लेषण।
इन सेवाओं के लिए अलग से कॉन्ट्रैक्ट मिलते हैं।
उदाहरण के तौर पर, 2019 में YSR कांग्रेस ने IPAC को लगभग ₹37.5 करोड़ सेवा शुल्क (consultancy fee) के रूप में दिया था।
IPAC की नेटवर्थ / मूल्य (Estimated Worth)
चूँकि IPAC एक प्राइवेट कंपनी है, सरकारी आंकड़ों के आधार पर इसका सटीक नेटवर्थ उपलब्ध नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनौतियों और बड़े चुनावी कॉन्ट्रैक्ट के कारण इसकी कुल वैल्यू करोड़ों रुपये में आंकी जाती है, लेकिन कोई पब्लिक-फिल्ड वैल्यूएशन नहीं है।
👉 यानी:
IPAC का सटीक नेटवर्थ नहीं है, लेकिन इसे भारत का एक बड़ा राजनीतिक कंसल्टिंग ब्राण्ड माना जाता है।
प्रशांत किशोर की NET WORTH (व्यक्तिगत)
प्रशांत किशोर, जिन्हें अक्सर PK कहा जाता है, भारत के जाने-माने राजनीतिक रणनीतिकार और अब जन सुराज पार्टी के संस्थापक नेता हैं।
उनकी व्यक्तिगत नेटवर्थ 2025 के आँकड़ों के अनुसार लगभग ₹45 करोड़ से ₹60 करोड़ के बीच आंकी गई है। यह राशि उन्हें मुख्यतः चुनावी सलाहकार सेवाओं, कंसल्टेंसी और प्रोजेक्ट्स से मिली आय के कारण मिली है।
prashantkishore.com
ध्यान दें: यह एक अनुमानित राशि है और यह समय-समय पर बदल सकती है depending on their work and assets.
थोड़ा संदर्भ
प्रशांत किशोर ने IPAC को शुरू किया था लेकिन 2021 के बाद उन्होंने खुद कंपनी से दूरी बनाई है। �
वर्तमान में IPAC कई पार्टियों के लिए अलग-अलग चुनावी सेवाएँ देती है।
अगर आप चाहें तो मैं IPAC के प्रमुख चुनावी प्रोजेक्ट्स, क्लाइंट्स और 2014 से अब तक उनके काम की डिटेल्ड लिस्ट भी दे सकता हूँ!

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